सद्धर्म की स्थापना करने वाले और प्रजापालन में तत्पर अशोक क्षत्रियों के उस कुल में पैदा हुए थे जो उच्च था और जिस कुल के लोग अंधविश्वासी नहीं थे।ये क्षत्रिय हिमालय से सटे हुए और कोसल व मगध से जुड़े क्षेत्र में रहते थे। चूंकि वे मयूर नाम वाले मोरों के देश में रहते थे,Continue reading “Ashoka The Great(chapter 2) अशोक वंश”
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Ashoka the Great(chapter 1)-अशोक-जातक
प्रियदर्शी राजा अशोक ने पूर्व जन्म में शाक्यनन्दन बुद्ध को देखा था। उस समय शास्ता( देशना-दायक, भगवान बुद्ध) राजगृह में वेणुवन (नामक बांस के जंगल) के कलन्दकनिकाप( वह प्रसिद्ध स्थान जहां गिलहरियों का अड्डा था) में विहार (धार्मिक प्रयोजन से कुछ समय के लिये ठहरना, प्रवास) कर रहे थे। एक दिन पूर्वाह्णकाल में मगधों कीContinue reading “Ashoka the Great(chapter 1)-अशोक-जातक”
वैदिक साहित्य का विभाजन(Vedic Literature Division)
वैदिक साहित्य को सुविधा की दृष्टि से चार भागों में बांटा जाता है : (1) वेदों की संहिताएं, (2) ब्राह्मण ग्रंथ, (3) आरण्यक ग्रंथ, (4) उपनिषद् । वैदिक संहिताएं : वेदों की चार सहिताएं हैं : ऋग्वेद संहिता, यजुर्वेद संहिता, सामवेद संहिता और अथर्ववेद संहिता। संहिता का अर्थ है – परः संन्निकर्षः संहिता -पदों काContinue reading “वैदिक साहित्य का विभाजन(Vedic Literature Division)”
वेदों का महत्व(The importance of the Vedas)
अनेक दृष्टियों से वेदों को महत्वपूर्ण माना गया है। संकेत रूप में कुछ तथ्य दिए जा रहे हैं : धार्मिक महत्व : वेद आर्यधर्म की आधारशिला हैं। धर्म के मूलतत्वों को जानने के एकमात्र साधन वेद हैं। विदोऽखिलो धर्ममूलम्। (मनु. २.७ )। मनु ने वेदों को सारे ज्ञानों का आधार मानकर उन्हें “सर्वज्ञानमय” कहा है,Continue reading “वेदों का महत्व(The importance of the Vedas)”
वेद शब्द की व्युत्पत्ति एवं अर्थ(Veda word derivation and meaning)
वेद शब्द ज्ञानार्थक विद् धातु (विद ज्ञाने) से घञ्(अ) प्रत्यय करने पर बनता है। इसका आशय है-ज्ञान। अतः वेद शब्द का अर्थ होता है-ज्ञान की राशि या ज्ञान का संग्रह-ग्रन्थ। प्राचीन ऋषियों ने जो ज्ञान अपनी आर्ष सृष्टि से प्राप्त किया था,उसका संग्रह वेदों में है। संस्कृत व्याकरण के अनुसार वेद शब्द चार धातुओं सेContinue reading “वेद शब्द की व्युत्पत्ति एवं अर्थ(Veda word derivation and meaning)”
वैदिक साहित्य एवं संस्कृति(Vedic literature and culture)
वेद भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। ये मानव जाति के लिए प्रकाश-स्तंभ हैं। विश्व को संस्कृति का ज्ञान देने का श्रेय वेदों को है। वेद ही विश्व-शांति ,विश्व-बंधुत्व और विश्व-कल्याण के प्रथम उद्घोषक हैं। वेदों की ज्योति ने ही आर्यजाति की समुन्नति का मार्ग प्रशस्त किया था। वेद ज्ञान के अथाह भंडार हैं। इनमें ज्ञानContinue reading “वैदिक साहित्य एवं संस्कृति(Vedic literature and culture)”
Historical significance of Buddhism
(1) आर्थिक क्षेत्र में(In Economic Realm)- •लोहे के फाल वाले हल से खेती, व्यापार और सिक्कों के प्रचलन से व्यापारियों और अमीरों को धन संचित करने का मौका मिला। किंतु बौद्ध धर्म ने घोषणा की कि धन संचित नहीं करना चाहिए क्योंकि धन दरिद्रता , घृणा, क्रूरता और हिंसा का जनक है। •इन बुराइयों कोContinue reading “Historical significance of Buddhism”
Buddhism in hindi
बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध एक क्षत्रिय थे। उनका जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व में शाक्यों के कुल में कपिलवस्तु के निकट लुम्बिनी ग्राम के आम्र कुंज में हुआ था । इनके पिता शुद्धोधन कपिलवस्तु के शाक्य गण के मुखिया तथा माता महामाया कौशल राजवंश की कन्या थीं । इनके जन्म के सातवें दिनContinue reading “Buddhism in hindi”
संधि विचार-दो वर्णों के मेल को संधि कहते हैं|
स्वर संधि (1) यण् संधि -(इको यणचि)-इ,ई को य्, उ ऊ को व्, ऋ ऋृ को र्, लृ को ल् हो जाता है, यदि बाद में कोई स्वर हो तो| सवर्ण (वैसा ही) स्वर हो तो नहीं | जैसे- (१) प्रति +एक:=प्रत्येक:। यदि+अपि = यद्यपि। (२) पठतु+एक: = पठत्वेक:। मधु+करि = मध्वरि। (३) पितृ +आContinue reading “संधि विचार-दो वर्णों के मेल को संधि कहते हैं|”
