यह बात चतुर्थ शताब्दी ईसा पूर्व की है जब सम्राट अशोक मगध साम्राज्य की राजगद्दी पर बैठा।अशोक के उत्थान से उसका सारा मंत्रिमंडल हर्षित हुआ और शत्रुमंडल प्रभावहीन हो गया। राधगुप्त जैसे अमात्यवर्ग ने अशोक के मार्ग को सफलता की ओर उन्मुख कर दिया। पिंगलवत्स (आजीवक आचार्य) जिन्होंने यह भविष्यवाणी की थी कि अशोक हीContinue reading “अशोक द्वारा अपने भाइयों का वध”
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निर्धनता
धन रुपी आश्रय जिसका नष्ट हो जाता है उसकी मित्रता से भी मनुष्य शिथिल हो जाते हैं। दरिद्रता से मनुष्य लज्जा को प्राप्त होता है, लज्जा को प्राप्त व्यक्ति तेजरहित हो जाता है, तेजहीन अपमानित होता है, अपमानित होने से ग्लानि को प्राप्त हो जाता है, ग्लानि युक्त शोक को प्राप्त होता है, शोकाकुल व्यक्तिContinue reading “निर्धनता”
The Value of money 💰💰
इस विश्व में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं होती है, जो धन के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है। अतएव बुद्धिमान् व्यक्ति को धन के लिए ही प्रयत्नशील रहना चाहिए।।1।। धनवान् व्यक्ति से सभी मित्रता करना चाहते हैं, धन के रहने पर बंधु-बान्धव भी आत्मीयता का व्यवहार करते हैं, धनवान् व्यक्ति की ही उत्तमContinue reading “The Value of money 💰💰”
The story of a lion and a rabbit
किसी वन में भासुरक नाम का एक शेर रहता था। बल अधिक होने के कारण वह प्रतिदिन अनेकों मृगों तथा खरगोशों आदि को मारा करता था फिर भी उसे शांति नहीं मिलती थी। किसी दिन वन के सभी जीव जैसे मृग, वराह, महिष तथा खरगोश आदि आपस में मिलकर उसके पास गए और बोले –Continue reading “The story of a lion and a rabbit”
rig veda in hindi translation pdf
rig veda in hindi translation
•अग्निमीलऴे पुरोहितमं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। होतारं रत्नधातमम्।। 1।। अनुवाद -(यज्ञ में) सर्वप्रथम आधान किए जाने वाले, यज्ञ के प्रकाशक, ऋतुओं के अनुसार यज्ञ को संपादित करने वाले, (देवताओं का) आह्वान करने वाले तथा धन को अतिशय रूप देने वाले अग्नि देवता की मैं स्तुति करता हूं। •अग्नि: पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत ।स देवां एह वक्षति ।।2।। अनुवाद- (जो)Continue reading “rig veda in hindi translation”
Ashoka The Great (chapter 4)-अशोक का जन्म
अपने पिता द्वारा अर्जित बहुत बड़े राज्य को पाकर राजा बिंदुसार को उतना हर्ष नहीं हुआ था, जितना कि अपने गुणों से अर्जित चंपानगरी की उस ब्राह्मण-कन्या को पाकर। ब्रह्मभवन में वैसी छटा नहीं थी, जैसी के पाटलिपुत्र के राज-भवन में उस कन्या के होने से। इस प्रकार की विविध लालित्यपूर्ण बातों का चिंतन करतेContinue reading “Ashoka The Great (chapter 4)-अशोक का जन्म”
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Yajurveda in hindi
(क) शुक्ल यजुर्वेद-संहिता- (क) शाखा : माध्यन्दिन (वाजसनेय) २. काण्व। (ख) ब्राह्मण : शतपथ ब्राह्मण। (ग) आरण्यक : बृहदारण्यक। (घ) उपनिषद् : १.ईशोपनिषद् , २.बृहदारण्यक उपनिषद्। (ङ) कल्पसूत्र : (श्रौतसूत्र) कात्यायन श्रौतसूत्र। (गृह्यसूत्र) पारस्कर गृह्यसूत्र। (शुल्वसूत्र) १.बौधायन, २.मानव, ३.आपस्तम्ब, ४.कात्यायन, ५.मैत्रायणीय, ६.हिरण्यकेशि (सत्याषाढ), ७.वाराह शुल्वसूत्र। (ख) कृष्ण यजुर्वेद-संहिता। (क) शाखा : १.तैत्तिरीय, २.मैत्रायणीय, ३.कठ (काठक),Continue reading “Yajurveda in hindi”
