(१) किरण, प्रकाशकिरण, (२) बिंदु या किनारा, (३) एक छोटा या सूक्ष्म कण, (४) धागे का छोर, (५) पोशाक, सजावट, परिधान, (६) गति।
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अंश (अंश्+अच्)
(१) हिस्सा, भाग, टुकड़ा; (२) संपत्ति में हिस्सा, दाय; (३) भिन्न की संख्या, कभी-कभी भिन्न के लिए भी प्रयोग था; (४) अक्षांश या रेखांश की कोटि।
अंश्
बांटना, वितरण करना, आपस में हिस्सा बांटना, ‘अंशापयति’ भी इसी अर्थ में प्रयुक्त होता है।
वैदिक साहित्य का विभाजन(Vedic Literature Division)
वैदिक साहित्य को सुविधा की दृष्टि से चार भागों में बांटा जाता है : (1) वेदों की संहिताएं, (2) ब्राह्मण ग्रंथ, (3) आरण्यक ग्रंथ, (4) उपनिषद् । वैदिक संहिताएं : वेदों की चार सहिताएं हैं : ऋग्वेद संहिता, यजुर्वेद संहिता, सामवेद संहिता और अथर्ववेद संहिता। संहिता का अर्थ है – परः संन्निकर्षः संहिता -पदों काContinue reading “वैदिक साहित्य का विभाजन(Vedic Literature Division)”
वेदों का महत्व(The importance of the Vedas)
अनेक दृष्टियों से वेदों को महत्वपूर्ण माना गया है। संकेत रूप में कुछ तथ्य दिए जा रहे हैं : धार्मिक महत्व : वेद आर्यधर्म की आधारशिला हैं। धर्म के मूलतत्वों को जानने के एकमात्र साधन वेद हैं। विदोऽखिलो धर्ममूलम्। (मनु. २.७ )। मनु ने वेदों को सारे ज्ञानों का आधार मानकर उन्हें “सर्वज्ञानमय” कहा है,Continue reading “वेदों का महत्व(The importance of the Vedas)”
वेद शब्द की व्युत्पत्ति एवं अर्थ(Veda word derivation and meaning)
वेद शब्द ज्ञानार्थक विद् धातु (विद ज्ञाने) से घञ्(अ) प्रत्यय करने पर बनता है। इसका आशय है-ज्ञान। अतः वेद शब्द का अर्थ होता है-ज्ञान की राशि या ज्ञान का संग्रह-ग्रन्थ। प्राचीन ऋषियों ने जो ज्ञान अपनी आर्ष सृष्टि से प्राप्त किया था,उसका संग्रह वेदों में है। संस्कृत व्याकरण के अनुसार वेद शब्द चार धातुओं सेContinue reading “वेद शब्द की व्युत्पत्ति एवं अर्थ(Veda word derivation and meaning)”
वैदिक साहित्य एवं संस्कृति(Vedic literature and culture)
वेद भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। ये मानव जाति के लिए प्रकाश-स्तंभ हैं। विश्व को संस्कृति का ज्ञान देने का श्रेय वेदों को है। वेद ही विश्व-शांति ,विश्व-बंधुत्व और विश्व-कल्याण के प्रथम उद्घोषक हैं। वेदों की ज्योति ने ही आर्यजाति की समुन्नति का मार्ग प्रशस्त किया था। वेद ज्ञान के अथाह भंडार हैं। इनमें ज्ञानContinue reading “वैदिक साहित्य एवं संस्कृति(Vedic literature and culture)”
संधि विचार-दो वर्णों के मेल को संधि कहते हैं|
स्वर संधि (1) यण् संधि -(इको यणचि)-इ,ई को य्, उ ऊ को व्, ऋ ऋृ को र्, लृ को ल् हो जाता है, यदि बाद में कोई स्वर हो तो| सवर्ण (वैसा ही) स्वर हो तो नहीं | जैसे- (१) प्रति +एक:=प्रत्येक:। यदि+अपि = यद्यपि। (२) पठतु+एक: = पठत्वेक:। मधु+करि = मध्वरि। (३) पितृ +आContinue reading “संधि विचार-दो वर्णों के मेल को संधि कहते हैं|”
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माहेश्वर सूत्र
• अइउण् १|ऋलृक् २|एओङ् ३|ऐऔच् ४|हयवरट् ५|लण् ६|ञमङणनम् ७|झभञ ८|घढधष् ९|जबगडदश् १०|खफछठथचटतव् ११|कपय् १२|शषसर् १३|हल् १४| अइउण् आदि 14 सूत्र प्रत्याहार सूत्र अथवा माहेश्वर सूत्र कहलाते हैं |’प्रत्याहार ‘शब्द इन सूत्रों के प्रयोजन ‘संक्षिप्तकरण’ को द्योतित करता है जबकि’ माहेश्वर’ शब्द इन सूत्रों की उत्पत्ति हैं अथवा आगम की ओर संकेत करता है। ऐसा मानाContinue reading “माहेश्वर सूत्र”
