निर्धनता

धन रुपी आश्रय जिसका नष्ट हो जाता है उसकी मित्रता से भी मनुष्य शिथिल हो जाते हैं। दरिद्रता से मनुष्य लज्जा को प्राप्त होता है, लज्जा को प्राप्त व्यक्ति तेजरहित हो जाता है, तेजहीन अपमानित होता है, अपमानित होने से ग्लानि को प्राप्त हो जाता है, ग्लानि युक्त शोक को प्राप्त होता है, शोकाकुल व्यक्तिContinue reading “निर्धनता”