खंड (क) : साहित्य परिचय (गद्य पद्य एवं नाटक)। निम्न ग्रंथों के निर्धारित अंकों के आधार पर शब्दार्थ, सूक्तियों का भावार्थ, शब्द की व्याकरणात्मक टिप्पणी, चरित्र चित्रण तथा ग्रन्थ कर्ता का परिचय । कादंबरी( कथामुखम्), नलचम्पू( प्रथम उच्छवास) शिशुपालवधम्( प्रथम सर्ग), अभिज्ञानशाकुंतलम् और मृच्छकटिकम्, गद्यकाव्य ,खंडकाव्य, महाकाव्य एवं नाट्यकाव्य के उद्भव और विकास का सामान्य परिचय खण्ड(ख): संस्कृत वाङमय में प्रतिबिंबित भारतीय दर्शन : इस खंड में श्रीमद्भगवद्गीता ,तर्कभाषा, सांख्यकारिका तथा वेदान्तसार के अनुसार प्रमुख दार्शनिक सिद्धांतों का सामान्य परिचय । खण्ड (ग) : काव्यशास्त्र (साहित्य दर्पण एवं काव्यप्रकाश के अनुसार) काव्य लक्षण, प्रयोजन, शब्द वृत्तियां, ध्वनि, रस एवं निम्नलिखित अलंकारों का परिज्ञान- अनुप्रास, यमक श्लेष, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, संदेह, भ्रांतिमान, अतिशयोक्ति, स्वभावोक्ति, विरोधाभास तथा परिसंख्या। खंड ( घ) : भाषा विज्ञान एवं व्याकरण भाषा का उद्भव एवं विकास, ध्वनि-परिवर्तन तथा अर्थ-परिवर्तन, सभी गुणों की प्रतिनिधि धातुओं का दसों लकारों में रूप (लघु सिद्धांत कौमुदी के आधार पर) सिद्धांत कौमुदी के आधार पर सभी कारकों विभक्तियों एवं समास का प्रक्रियात्मक ज्ञान निम्नलिखित प्रत्ययों का प्रयोगात्मक ज्ञान- कृत, तव्यत्, अनीयर्,यत्,धंश्,तृच …… क्त,क्तवतु,क्त्वा,ल्यप्,शतृ,शानच्,तुमुन्,तद्धित्,अक्,वतुप्,मतुप्, ढक ,ढकी,फक,ख,यत्,एवं छः स्त्री प्रत्यय -टाप्,डप्र,ङीप्,ङीन …. विशेष उक्त प्रत्यय लघु सिद्धांत कौमुदी के आधार पर प्रेष्टव्य हैं खण्ड ( ङ) : रचना एवं पारिभाषिक पद। (क) संस्कृत सुभाषित एवं सूक्तियों का परिज्ञान, अशुद्धि परिमार्जन और वाक्य परिवर्तन (ख) नाटक में प्रयुक्त पारिभाषिक शब्दों का ज्ञान
